आबूरोड: दुनिया तेजी से बदल रही है। तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), नए उद्योग और बदलती अर्थव्यवस्था ने शिक्षा के सामने नई चुनौतियां और अवसर प्रस्तुत किए हैं। ऐसे समय में भारत की ब्रिक्स 2026 की अध्यक्षता शिक्षा के क्षेत्र में युवाओं के लिए नए वैश्विक अवसरों का मार्ग प्रशस्त कर सकती है। शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री हासिल करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को बदलती दुनिया की चुनौतियों और अवसरों के लिए सक्षम बनाना होना चाहिए।
माधव विश्वविद्यालय के चेयरमैन प्रो. (डॉ.) राजकुमार ने कहा कि ब्रिक्स के शिक्षा संबंधी विमर्श में कौशल विकास, अनुसंधान, नवाचार, तकनीक और सदस्य देशों के बीच शैक्षणिक सहयोग जैसे विषयों को महत्व दिया गया है। विद्यार्थियों को देश में रहते हुए भी दूसरे देशों के शिक्षकों, शोधकर्ताओं और शैक्षणिक संस्थानों से जुड़ने के अवसर मिल सकते हैं। ब्रिक्स देशों के बीच शैक्षणिक सहयोग और योग्यताओं की पारस्परिक मान्यता की दिशा में हो रहा कार्य भविष्य में विद्यार्थियों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।
उन्होंने कहा कि इन अवसरों का लाभ केवल महानगरों के विद्यार्थियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी प्रतिभाशाली विद्यार्थी हैं, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय शोध, छात्रवृत्ति और शैक्षणिक सहयोग के अवसरों की जानकारी एवं उचित मार्गदर्शन मिलना जरूरी है। विश्वविद्यालयों को विद्यार्थियों को वैश्विक शैक्षणिक अवसरों से जोड़ने में सक्रिय भूमिका निभानी होगी।
प्रो. (डॉ. ) राजकुमार ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता ने शिक्षा और काम करने के तरीकों को तेजी से बदल दिया है। विद्यार्थियों को केवल एआई का उपयोग करना सिखाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उन्हें सही जानकारी खोजने, उसकी सत्यता जांचने और किसी समस्या पर स्वतंत्र रूप से सोचने की क्षमता भी विकसित करनी होगी। शिक्षा में रटने की बजाय समझ, तर्क, प्रयोग और रचनात्मकता को प्राथमिकता देनी होगी। विद्यार्थियों को परियोजनाओं, प्रयोगशाला कार्य और वास्तविक समस्याओं पर काम करने के अवसर मिलने चाहिए।
उन्होंने कहा कि रोजगार की दुनिया भी तेजी से बदल रही है। ऐसे में डिग्री के साथ व्यावहारिक कौशल आवश्यक हो गया है। तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा, डिजिटल कौशल और हरित कौशल को शिक्षा का अभिन्न हिस्सा बनाना होगा। विद्यार्थियों को पढ़ाई के दौरान ही यह समझने का अवसर मिलना चाहिए कि उनके विषय का वास्तविक जीवन और रोजगार से क्या संबंध है। कक्षा की पढ़ाई के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण और काम करके सीखने की व्यवस्था को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है।चेयरमैन प्रो. (डॉ. ) राजकुमार
ने अनुसंधान और नवाचार को उच्च शिक्षा का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों में होने वाला शोध केवल शोधपत्र प्रकाशित करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उसका संबंध समाज और देश की वास्तविक जरूरतों से होना चाहिए। विश्वविद्यालय, उद्योग और शोध संस्थान मिलकर कार्य करें तो विद्यार्थियों को वास्तविक समस्याओं पर शोध करने और नए समाधान विकसित करने के अवसर मिल सकते हैं। विश्वविद्यालयों में ऐसा वातावरण विकसित करना जरूरी है, जहां विद्यार्थी सवाल पूछने और नए विचारों पर काम करने के लिए प्रोत्साहित हों।
उन्होंने कहा कि आधुनिक शिक्षा का अर्थ अपनी ज्ञान-परंपरा से दूर होना नहीं है। विज्ञान और तकनीक के साथ स्थानीय परिस्थितियों और पारंपरिक ज्ञान को समझना भी जरूरी है। भारत की समृद्ध ज्ञान-परंपरा और आधुनिक विज्ञान एक-दूसरे के पूरक बन सकते हैं। प्रो. (डॉ. ) राजकुमार
ने कहा कि ब्रिक्स 2026 में शिक्षा से जुड़े विमर्श का वास्तविक लाभ तभी होगा, जब वैश्विक स्तर पर होने वाली चर्चाएं हमारे विद्यालयों और विश्वविद्यालयों की कक्षाओं तक पहुंचें। शिक्षा की सफलता किसी सम्मेलन या दस्तावेज से नहीं, बल्कि इस बात से तय होगी कि वह देश के युवाओं को कितना सक्षम, आत्मनिर्भर, रचनात्मक और वैश्विक अवसरों के लिए तैयार बनाती है।
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